नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बुधवार को संसद में पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की उस अप्रकाशित किताब की कॉपी लेकर पहुंचे, जिसपर पिछले तीन दिनों से वि*वाद हो रहा है। दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कारवां मैगजीन में एक अप्रकाशित किताब (फ़ॉर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी) पर छपे लेख के अंश सोमवार को संसद में पढ़ने की कोशिश की थी। यह किताब पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद (एमएम) नरवणे ने लिखी है।
जिस पर भाजपा के नेताओं ने आपत्ति जताई और कहा कि अप्रकाशित किताब के अंश कैसे पढ़े जा सकते हैं। बुधवार को संसद परिसर में किताब की प्रति दिखाते हुए राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा कि सरकार कह रही है कि ये किताब नहीं है, स्पीकर कह रहे हैं कि ये किताब नहीं है। भारत के हर युवा को देखना चाहिए ये किताब है। ये नरवणे जी की किताब है। इसमें उन्होंने पूरा अकाउंट लिखा है, लद्दाख का, और मुझे कहा गया है कि मैं इस बुक को कोट नहीं कर सकता हूं। राहुल गांधी ने किताब पढ़ते हुए कहा कि यहां पर जो मेन लाइन है, प्रधानमंत्री ने कहा- जो उचित समझो, वो करो।
चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल नरवणे ने राजनाथ सिंह को फोन किया और कहा कि देखिए कैलाश रिज पर चाइनीज टैंक आ गए हैं, हमें क्या करना है। पहले राजनाथ सिंह ने उनको रिप्लाई नहीं किया। उन्होंने (सेना अध्यक्ष) जयशंकर जी पूछा, एनएसए से पूछा, राजनाथ सिंह से पूछा। कोई रिप्लाई नहीं आया। राहुल गांधी ने किताब के हवाले से कहा कई फिर उन्होंने (सेनाध्यक्ष) राजनाथ सिंह को फोन किया। तो राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं टॉप से पूछता हूं। टॉप का ऑर्डर था कि अगर चाइनीज फोर्सेज अंदर आएंगे, तो उन पर बिना हमसे पूछे फायर नहीं करना है।
नरवणे और हमारी सेना उनपर फायर करना चाहती थी क्योंकि टैंक्स हमारी टेरिटरी में आ गए थे। नरेंद्र मोदी जी ने मेसेज दिया कि देखिए, जो उचित समझो वो करो। राहुल गांधी जिस अप्रकाशित किताब के कुछ अंश पढ़ रहे थे, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वह किताब जनवरी 2024 में बाजार में आने वाली थी लेकिन भारतीय सेना इस किताब की जांच कर रही है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को नियम 349 (1) का हवाला देते हुए कहा था कि किसी भी किताब, ईमेल पर चर्चा कैसे सदन में हो सकती है। उन्होंने कहा कि मैंने रूल बुक पढ़ी हुई है। नियम और परंपरा रही है कि अखबार की कटिंग, किताब और ऐसे विषय जो प्रमाणिक नहीं हैं, उन पर सदन में चर्चा की परंपरा नहीं रही है। सत्ता पक्ष नियमों का हवाला देते हुए राहुल गांधी के पत्रिका के अंश पढ़ने पर आपत्ति जता रहा है।
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