सवाई माधोपुर: Sawai Madhopur जिले की विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जिला कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। धरने में कांग्रेस (Congress), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party), भू प्रेमी परिवार संगठन, पथिक लोक सेवा समिति सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, किसान, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवाओं ने भाग लिया।

इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता एड. मुकेश भूप्रेमी ने कहा कि यह आंदोलन दिल्ली (Delhi) के आंदोलन के समर्थन के साथ-साथ सवाई माधोपुर के विकास और जनहित के मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने के लिए आयोजित किया गया है। उन्होंने जिले को संभाग एवं पिछड़ा जिला घोषित करने, कृषि विश्वविद्यालय (Agricultural University) की स्थापना, औद्योगिक विकास (Industrial development), स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन (Employment), शिक्षा (Education) व्यवस्था में सुधार, लंबित छात्रवृत्तियों (Scholarships) का भुगतान, रिक्त शिक्षकों की भर्ती, 600 से अधिक हरे पेड़ों की कटाई (Cutting of Trees) की उच्चस्तरीय जांच, विकास कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच, सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता, कुंडेरा थाना हेमराज प्रकरण में दोषियों पर कार्रवाई, अ_वैध प्लॉटिंग व भू-माफियाओं पर सख्त कार्रवाई, किसानों को पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने, अ_वैध आरा मशीनों पर रोक, हम्मीर ब्रिज का शेष कार्य शीघ्र पूरा कराने तथा जिला अस्पताल (General Hospital Sawai Madhopur) की चिकित्सा व्यवस्था में सुधार सहित कई मांगें रखीं।
रामगोपाल गुणसरिया (सीपीआई) ने निजीकरण, शिक्षा के व्यवसायीकरण और जिले में भू-माफियाओं, अधिकारियों व नेताओं की मिलीभगत से सरकारी भूमि पर हो रहे अ_वैध कारोबार का मुद्दा उठाया। उन्होंने खैरदा रीको क्षेत्र (RIICO) की 32 बीघा गैर मुमकिन औद्योगिक भूमि, रिलायंस पंप के सामने मंदिर माफी भूमि, ईदगाह (Eidgaah) के पास खेल मैदान (Sports Ground) तथा विभिन्न गांवों की चरागाह भूमि पर हो रही अ_वैध प्लॉटिंग की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की। साथ ही लोगों से भूमि खरीदने से पहले सत्यापन करने की अपील की।
राजेश पहाड़िया (कांग्रेस) ने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है और लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने का हर प्रयास विफल होगा। बंशीलाल मीणा ने जिले की समस्याओं की अनदेखी पर चिंता जताते हुए कहा कि अब जनता अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर व्यापक जनआंदोलन करेगी। वहीं प्रेमराज मीना (AAP) ने कहा कि देश और जनहित के लिए सभी को एकजुट होकर लगातार संघर्ष करना होगा।
धरने को अनिल गुणसरिया, गफ्फार खान (कांग्रेस), आर.पी. मीणा (कांग्रेस प्रदेश सचिव, अभाव प्रकोष्ठ), अबसार अहमद (भू प्रेमी परिवार संगठन), शंकरलाल पीलोदा, रामसिंह मीणा (पूर्व सरपंच) एवं शंकरलाल कयावद ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने संसद मार्च के दौरान हुई घटनाओं की निंदा करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
धरने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर (Collector Sawai Madhopur) के माध्यम से राष्ट्रपति (President of India) एवं मुख्यमंत्री (Chief Minister of Rajasthan) के नाम दो ज्ञापन सौंपे। राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन में शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर स्थायी रोक, युवाओं को रोजगार, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई। वहीं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में जिले को संभाग एवं पिछड़ा जिला घोषित करने, कृषि विश्वविद्यालय, औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार, 600 से अधिक पेड़ों की कटाई की जांच, कुंडेरा थाना हेमराज प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई, अ_वैध प्लॉटिंग पर रोक, किसानों को पर्याप्त उर्वरक, अ_वैध आरा मशीनों पर कार्रवाई, हम्मीर ब्रिज का निर्माण शीघ्र पूरा कराने तथा जिले के विकास कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच सहित 13 प्रमुख जनहित मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि ज्ञापनों में उठाई गई मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो जिलेभर में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
धरनास्थल पर वतन फाउंडेशन की ओर से पानी व शीतल पेय की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम में डॉ. हरिमोहन मीणा (पूर्व अध्यक्ष, आम आदमी पार्टी), अवधेश शर्मा, सोनिका शर्मा (कांग्रेस), अजय शर्मा (कांग्रेस), पुरुषोत्तम जोलिया (पार्षद), सतीश जैन (आम आदमी पार्टी), लक्ष्मी नारायण मीणा, देवीलाल मीणा, रईस अहमद, शारिक अंसारी, मोहम्मद अनीस, ओमप्रकाश वर्मा, दुर्गालाल (सीपीआई), दीनदयाल वर्मा, सलीम रंगरेज, रईस अहमद करमोदा, रतनलाल मीणा, शंभूदयाल मीणा, राधेश्याम मीणा, केसरलाल मीणा, शंकरलाल मीणा, अब्दुल गफ्फार, स्वराज मीणा, दामोदर मीणा, छोटनलाल मीणा, प्रभुलाल मीणा, दुर्गालाल बेरवा, हेमराज भूप्रेमी, ओमप्रकाश, मानसिंह मीणा, भेरूलाल मीणा, रामविलास, संजय गौतम, डी.के. मीणा सहित बड़ी संख्या में विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, किसान संगठनों, अधिवक्ताओं, युवाओं एवं नागरिकों ने भाग लिया।
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