जयपुर: साइबर ठ_गों ने 90 वर्षीय पूर्व जिला जज (Judge) को डिजिटल अरे_स्ट कर करीब 2 करोड़ 50 लाख 51 हजार रुपये की ठ_गी कर ली। आरोपियों ने खुद को CBI अधिकारी और RBI मैनेजर बताकर हवाला लेनदेन में गिरफ्तारी का डर दिखाया और करीब 15 दिन तक पीड़ित को अपने जाल में फंसाए रखा। इस दौरान 3 से 10 अगस्त के बीच अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई।

हालांकि SBI मैनेजर की सतर्कता से पीड़ित के PPF खाते से होने वाला बड़ा ट्रांजैक्शन रुक गया और पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद बुधवार शाम ज्योति नगर थाने में FIR दर्ज कराई गई।
WhatsApp वीडियो कॉल से शुरू हुआ डिजिटल अरेस्ट:
पुलिस (Jaipur Police) को दी रिपोर्ट में पीड़ित के भांजे रविन्द्र सिंह मोहनोत ने बताया कि सी-54, लालकोठी स्कीम निवासी गणपत सिंह भण्डारी (90) को 28 जुलाई को मोबाइल नंबर 8279809644 से WhatsApp पर वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाला व्यक्ति पुलिस (Police) की वर्दी में था और उसने खुद को मुंबई CBI अधिकारी बताया।
आरोपी ने दावा किया कि मुंबई में 50 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का खुलासा हुआ है, जिसमें से 40 लाख रुपये पीड़ित के SBI खाते में आए हैं। गिरफ्तारी और मुंबई (Mumbai) ले जाने की ध_मकी देकर उसे जांच में सहयोग करने को कहा गया। साथ ही परिवार के किसी सदस्य को जानकारी नहीं देने की चेतावनी दी गई।
RBI मैनेजर बनकर भी किया फोन:
कुछ देर बाद दूसरे व्यक्ति ने WhatsApp कॉल कर खुद को RBI मैनेजर बताया। उसने दावा किया कि हवाला की रकम से म्यूचुअल फंड में निवेश किया गया है और इसकी जानकारी मांगी।
डर के चलते पीड़ित ने आरोपियों को अपने म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) और अन्य वित्तीय दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध करा दी। इसके बाद आरोपियों ने जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों (Bank Accounts) में रकम ट्रांसफर करवाई। FIR के अनुसार यह रकम पीड़ित के गांधी नगर स्थित SBI खाते से भेजी गई।
चैट और कॉल हिस्ट्री भी करवाते थे डिलीट:
ठ_ग हर कॉल के बाद WhatsApp चैट, कॉल हिस्ट्री और अन्य मैसेज डिलीट करने के निर्देश देते थे। भय और दबाव के कारण पीड़ित ने ऐसा ही किया, जिससे परिवार को काफी समय तक ठ_गी की जानकारी नहीं हो सकी।
PPF की रकम ट्रांसफर होने से पहले बैंक मैनेजर ने बचाया:
आरोपियों ने इसके बाद पीड़ित को PPF खाते की रकम भी ट्रांसफर करने के लिए कहा। बुधवार सुबह जब पूर्व जज SBI की जौहरी बाजार शाखा पहुंचे और PPF की राशि ट्रांसफर कराने लगे, तो बैंक मैनेजर को मामला संदिग्ध लगा।
पूछताछ में पूरी स्थिति सामने आने पर मैनेजर ने ट्रांजैक्शन रुकवा दिया और पीड़ित को बताया कि वह साइबर ठ_गी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद पीड़ित ने अपने भांजे रविन्द्र सिंह मोहनोत को बुलाया और पूरी जानकारी दी। मामले की शिकायत ज्योति नगर थाने में दर्ज कराई गई।
पुलिस (Jaipur) ने FIR के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा और IT Act की धारा के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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