कोटा: स्थानीय निकाय चुनावों (Local body elections) को लेकर हुई आरक्षण लॉटरी (Reservation Lottery) के बाद कोटा (Kota) जिले में नगर निगम (Nagar Nigam Kota) और नगर पालिकाओं (Nagar Palika) की तस्वीर साफ हो गई है। कोटा नगर निगम में इस बार महापौर (Mayor) पद ओबीसी (OBC) महिला के लिए आरक्षित (Reserved) किया गया है। वहीं, नवगठित सुल्तानपुर नगर पालिका (Sultanpur Nagar Palika) एससी ओपन (SC Open) और सुकेत नगर पालिका (Suket Nagar Palika) ओबीसी ओपन (OBC Open) के लिए आरक्षित हुई है।

कोटा की इटावा नगर पालिका (Itawa Nagar Palika) में इस बार अध्यक्ष पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित किया गया है। पिछली बार यहां ओबीसी महिला सीट थी। रामगंजमंडी (Ramganjmandi) में इस बार भी अनारक्षित ओपन सीट रहेगी, जबकि सांगोद (Sangod Nagar Palika) में पिछली बार की अनारक्षित महिला सीट के मुकाबले इस बार अनारक्षित ओपन सीट निर्धारित हुई है।
100 वार्ड में होगा कोटा नगर निगम का चुनाव:
दिसंबर 2025 में पुराने नगर निगमों का कार्यकाल पूरा होने के बाद कोटा इस बार नए परिसीमन के साथ चुनावी मैदान में उतरेगा। पहले कोटा उत्तर (Kota North) में 70 और कोटा दक्षिण (Kota South) में 80, यानी कुल 150 वार्ड थे। दोनों नगर निगमों (Nagar Nigam) के एकीकरण और नए परिसीमन के बाद अब कोटा नगर निगम में 100 वार्ड रह गए हैं।
नगर निगम के 100 वार्डों के लिए 721 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। वहीं, जिले की पांच नगर पालिकाओं-रामगंजमंडी, सुकेत (Suket), सांगोद (Sangod), इटावा (Itawa) और सुल्तानपुर (Sultanpur) में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के साथ कुल 160 वार्ड पार्षद चुने जाएंगे।
15.29 लाख मतदाता करेंगे मतदान:
स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों (Panchayatri Raj Election) के साथ कोटा जिले में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जिले में कुल 15.29 लाख मतदाता (Voters) स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के लिए मतदान करेंगे। इनके जरिए कुल 2,559 जनप्रतिनिधियों का चुनाव होगा।
शहरी क्षेत्र के छह निकायों के 260 वार्डों के लिए कुल 884 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें अकेले कोटा नगर निगम के 100 वार्डों के 721 मतदान केंद्र शामिल हैं।
सुल्तानपुर में पहली बार होगा नगर पालिका चुनाव:
नवगठित सुल्तानपुर नगर पालिका में पहली बार स्थानीय निकाय चुनाव होगा। इसे एससी ओपन के लिए आरक्षित किया गया है। इसके अलावा पंचायत समिति चेचट भी इस बार पहली बार चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख, जिला परिषद सदस्य, प्रधान, उप प्रधान, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच, उप सरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव होंगे। जिले की छह पंचायत समितियों की 210 ग्राम पंचायतों में 717 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे।
आरक्षण बदलने से बदलेगा राजनीतिक समीकरण:
आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद अब संभावित प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ने की उम्मीद है। खास तौर पर कोटा नगर निगम में महापौर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित होने से राजनीतिक दलों को नए सिरे से रणनीति तैयार करनी होगी।
आरक्षण का मतलब:
- अनारक्षित ओपन: किसी भी वर्ग का पुरुष या महिला चुनाव लड़ सकता है।
- अनारक्षित महिला: किसी भी वर्ग की महिला प्रत्याशी चुनाव लड़ सकती है।
- ओबीसी ओपन: ओबीसी वर्ग से पुरुष या महिला प्रत्याशी बन सकता है।
- ओबीसी महिला: केवल ओबीसी वर्ग की महिला प्रत्याशी दावेदारी कर सकती है।
- एससी ओपन: एससी वर्ग से पुरुष या महिला प्रत्याशी बन सकता है।
- एससी महिला: एससी वर्ग की महिला ही प्रत्याशी बन सकती है।
- एसटी ओपन: एसटी वर्ग से पुरुष या महिला प्रत्याशी चुनाव लड़ सकता है।
- एसटी महिला: एसटी वर्ग की महिला ही प्रत्याशी बन सकती है।
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