टोंक: एसडीएम (SDM) को थप्पड़ मारने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) से सशर्त जमानत मिलने के बाद नरेश मीणा (Naresh Meena) बुधवार को टोंक (Tonk) जेल से रिहा हो गए। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा कि अब वे पूरी ताकत के साथ पंचायत राज चुनाव (Panchayati Raj Election) लड़ेंगे। रिहाई के दौरान समर्थकों ने उनका स्वागत किया।

नरेश मीणा ने कहा कि जिस क्रांति की बात वे लगातार करते आए हैं, उसकी शुरुआत हाड़ौती (Hadauti) से हो चुकी है। उन्होंने अपने दोस्त और बारां (Baran) नगर परिषद (Nagar Parishad) के पूर्व चेयरमैन कमल राठौर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इसकी शुरुआत कर दी है। नरेश मीणा के मुताबिक, कमल राठौर के पास अभी चुनाव चिह्न नहीं था, इसलिए उन्होंने आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
‘हाड़ौती में क्रांति की शुरुआत हो चुकी है’:
रिहाई के बाद नरेश मीणा ने कहा कि लोग उन पर विश्वास कर रहे हैं और राजनीति (Politics) में अच्छे लोग आएं, इसके लिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेल में रहने के दौरान भी उनके साथी पूरे हौसले के साथ उनके साथ खड़े रहे।
उन्होंने कहा कि इस दौरान जगह-जगह शांतिपूर्ण आंदोलन किए गए और उनके साथी लगातार लोगों की सेवा में जुटे रहे। नरेश मीणा ने आगे भी जनसेवा जारी रखने की बात कही।
समरावता प्रकरण का किया जिक्र:
नरेश मीणा ने समरावता (Samrawata) प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हाईकोर्ट (High Court) की जमानत शर्तों की पालना करते हुए कई आंदोलनों से दूरी बनाए रखी थी। इसी दौरान झालावाड़ (Jhalawar) में स्कूल हादसा हुआ, जिसके बाद उन्होंने खुद को रोक नहीं पाया और शांतिपूर्ण धरने में शामिल हुए।
नरेश मीणा के अनुसार, राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) ने इस धरने को हाईकोर्ट की शर्तों का उल्लंघन बताते हुए कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश किया था। इसके बाद उनकी जमानत खारिज हो गई थी। अब दोबारा जमानत मिलने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें कोर्ट पर पूरा भरोसा था और उन्हें शर्तों के साथ न्याय मिला है। उन्होंने कहा कि आगे भी हाईकोर्ट की शर्तों का पालन करते हुए जनसेवा जारी रखेंगे।
वकील बोले- जनहित में धरना प्रदर्शन करते हैं:
नरेश मीणा के एडवोकेट फतेहराम मीणा ने बताया कि उन्हें महीने में एक बार थाने में उपस्थिति दर्ज कराने और किसी अन्य आपराधिक मामले में शामिल नहीं होने की शर्त पर जमानत दी गई है। हाईकोर्ट की मौजूदा जमानत शर्तों में नियमित पुलिस उपस्थिति और किसी अन्य अपराध में शामिल नहीं होने की शर्तें शामिल हैं।
वकील ने कहा कि नरेश मीणा झालावाड़ अस्पताल परिसर में मृ_तक स्कूली बच्चों के परिजनों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर शांतिपूर्वक धरने पर बैठे थे। उनके मुताबिक, पुलिस ने इसे हाईकोर्ट की शर्तों का उल्लंघन मानते हुए कोर्ट में बताया था कि नरेश मीणा ने आईसीयू सेवा बाधित की और चिकित्साकर्मियों से मा_रपीट की।
एडवोकेट फतेहराम मीणा ने इन दावों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नरेश मीणा उस दिन अस्पताल परिसर से बाहर नहीं गए थे। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम के फुटेज मीडियाकर्मियों और अन्य लोगों के पास हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि नरेश मीणा कोर्ट का सम्मान करते हैं और आगे भी कोर्ट की शर्तों का पालन करेंगे।
विधानसभा उपचुनाव में एसडीएम को थप्पड़ मारने का मामला:
नरेश मीणा देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव-2024 (Deoli Uniara Assembly by Election) के दौरान 13 नवंबर 2024 को टोंक के समरावता गांव में एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मारने के मामले में जेल गए थे। इसके बाद समरावता सहित आसपास के इलाकों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थीं।
नरेश मीणा ने रिहाई के बाद कहा कि राजनीति में किसी व्यक्ति को केवल चुनाव हराकर ही नहीं, बल्कि किसी मामले में फंसाकर भी उसकी राजनीतिक ह_त्या की जा सकती है। यह उनका आरोप/राजनीतिक दावा है।
नरेश मीणा ने कहा कि उन्होंने पहले भी न्यायपालिका पर भरोसा रखा और आगे भी कोर्ट की शर्तों का पालन करते हुए अपनी राजनीतिक गतिविधियां जारी रखेंगे। हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई बुधवार को हुई।
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