कोटा: राजस्थान (Rajasthan) के कोटा (Kota) जिले में श_व की बेकद्री का मामला सामने आया है। सांगोद (Sangod) नगर पालिका में ठेके पर काम करने वाले सफाई कर्मचारी 40 वर्षीय राकेश की मौ_त के बाद परिजनों को उनका श_व कचरा उठाने वाले टिपर में घर लाना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि श_व से बदबू आने के कारण एंबुलेंस और निजी वाहन चालकों ने उसे ले जाने से इनकार कर दिया। नगर पालिका (Nagar Palika Sangod) से भी शुरुआत में मदद नहीं मिली।

जानकारी के अनुसार, राकेश तीन दिन से लापता थे। शनिवार, 10 अक्टूबर को पुलिस से परिजनों को उनकी मौ_त की सूचना मिली। उनका श_व सांगोद (Sangod, Kota) से करीब 20 किलोमीटर दूर खानपुर (Khanpur) में मिला, जहां परिजनों ने अस्पताल में श)व की पहचान की।
एंबुलेंस नहीं मिली तो भाई कचरा गाड़ी लेकर पहुंचा:
परिजनों ने खानपुर अस्पताल प्रशासन से श_व को सांगोद ले जाने के लिए एंबुलेंस या श_व वाहन उपलब्ध कराने की मांग की। कई निजी एंबुलेंस संचालकों से भी संपर्क किया, लेकिन किसी ने श_व ले जाने की हामी नहीं भरी।
इसके बाद राकेश के भाई आकाश खुद कचरा उठाने वाला टिपर लेकर खानपुर पहुंचे और उसी में श_व को घर लाए। आकाश भी सांगोद नगर पालिका में अस्थायी टिपर चालक के रूप में काम करते हैं। उनके मुताबिक, श_व ले जाने से पहले गाड़ी को धोया गया था। मजबूरी में उन्हें इसी वाहन का सहारा लेना पड़ा।
करीब एक घंटे तक टिपर में रहा श_व:
नगर पालिका के जमादार हंसराज ने बताया कि श_व खानपुर में था और बदबू के कारण कोई वाहन उसे लाने के लिए तैयार नहीं हो रहा था। परिजनों के कहने पर श_व लाने के लिए टिपर भेजा गया था।
परिजनों के अनुसार, श_व करीब एक घंटे तक कचरा गाड़ी में रहा। घर पहुंचने के कुछ देर बाद ही राकेश का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस घटना ने श_व को सम्मानपूर्वक घर तक पहुंचाने के लिए जरूरी व्यवस्था और जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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