उदयपुर/सवाई माधोपुर: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर (Mohanlal Sukhadia University, Udaipur) के वनस्पति विज्ञान विभाग (Department of Botany) के सहायक आचार्य डॉ. मुकेश मीणा (Assistant Professor Dr. Mukesh Meena) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और उपलब्धि हासिल की है। उन्हें लगातार पांचवें वर्ष, यानी 2022 से 2026 तक, विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों (Scientist) की प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिला है। यह उपलब्धि उनके निरंतर शोध कार्य, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित शोध और वैज्ञानिक क्षेत्र में योगदान को दर्शाती है।

यह सूची स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय (Stanford University) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित और Elsevier के Scopus डेटाबेस पर आधारित है। इसमें वैज्ञानिकों के शोध प्रभाव का आकलन विभिन्न मानकीकृत संकेतकों के आधार पर किया जाता है। इनमें शोध पत्रों के Citations, H-Index, सह-लेखक योगदान से जुड़े मानक और संयुक्त उद्धरण सूचकांक प्रमुख हैं।
पौधों और सूक्ष्मजीवों के संबंधों पर शोध:
डॉ. मीणा का प्रमुख शोध क्षेत्र पौधों एवं सूक्ष्मजीवों (Plants and Microorganisms) के पारस्परिक संबंध, कवक विज्ञान (Mycology), पादप रोग विज्ञान (Plant Pathology) और पौधों में रोग उत्पन्न करने वाले रोगजनकों का अध्ययन है। उनके शोध में पौधों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता, कवकों से प्राप्त जैवसक्रिय पदार्थ तथा पौधों के स्वास्थ्य और संरक्षण जैसे विषय शामिल हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में 170 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। इसके अलावा Springer Nature और Elsevier जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों से प्रकाशित 8 पुस्तकों के लेखन और संपादन में भी योगदान दिया है।
उनके शोध कार्यों को विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा उद्धृत किया गया है। उनके अध्ययन पादप रोगों की प्रक्रिया को समझने, बेहतर रोग प्रबंधन उपाय विकसित करने और कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक ज्ञान को आगे बढ़ाने में उपयोगी माने जाते हैं।
ScholarGPS में भी बड़ी उपलब्धि:
डॉ. मीणा को वर्ष 2024 की ScholarGPS® रैंकिंग में भी विश्व के शीर्ष 0.05 प्रतिशत वैज्ञानिकों में स्थान मिला था। यह रैंकिंग शोधकर्ताओं के अकादमिक योगदान और उनके शोध के प्रभाव का मूल्यांकन करती है।
सामाजिक कार्यकर्ता हरिसिंह बारवाल ने बताया कि डॉ. मीणा की लगातार पांच वर्षों की यह अंतरराष्ट्रीय पहचान उनके साथ-साथ मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय और राजस्थान के उच्च शिक्षा (Higher Education) एवं वैज्ञानिक अनुसंधान क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी सफलता युवा शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगी।
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