जयपुर: राजस्थान (Rajasthan) के नगरीय निकाय चुनावों (Nagar Nikay Chunav) में इस बार कुछ ऐसे उम्मीदवार भी निकाय प्रमुख के पद की दौड़ में हैं, जो पार्षद (Parshad) का चुनाव (Election) नहीं जीत सके या पार्षद बने ही नहीं। राजस्थान के मौजूदा चुनाव नियमों के तहत मेयर (Mayor), सभापति (Chairman) या अध्यक्ष (President) पद के लिए उम्मीदवार का निर्वाचित पार्षद होना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, निकाय प्रमुख का चुनाव निर्वाचित सदस्यों की बैठक में होता है और वोट (Vote) सिर्फ निर्वाचित सदस्य ही डालते हैं।

2019 में बदला था नियम:
राजस्थान सरकार (Government of Rajasthan) ने 2019 में राजस्थान नगरपालिका (निर्वाचन) नियम, 1994 (Rajasthan Municipalities (Election) Rules, 1994) में संशोधन किया था। इसके बाद निकाय प्रमुख के चुनाव में गैर-निर्वाचित सदस्य भी उम्मीदवार बन सकते हैं। इसी व्यवस्था को आम तौर पर हाइब्रिड फॉर्मूला कहा जाता है।
पायलट ने जताया था विरोध:
यह प्रावधान लागू होने के समय तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि गैर-पार्षदों को निकाय प्रमुख बनाने से पहले कैबिनेट में पर्याप्त चर्चा नहीं हुई और इससे ‘बैकडोर एंट्री’ को बढ़ावा मिल सकता है। यह उनका उस समय का राजनीतिक मत था।
कौन नहीं लड़ सकता चुनाव?
नियमों के अनुसार कुछ पदों पर रहते हुए व्यक्ति निकाय प्रमुख का चुनाव नहीं लड़ सकता। इनमें सांसद (Member of Parliament), (MLA) विधायक और पंचायती राज (Panchayari Raj) संस्थाओं के कुछ निर्वाचित पद शामिल हैं। चुनाव की पात्रता संबंधित मौजूदा नियमों के अनुसार तय होती है।
कितनी होती है जमानत राशि?
निकाय प्रमुख के पद के लिए अलग-अलग जमानत राशि निर्धारित है। 2019 के नियमों में मेयर के लिए सामान्य उम्मीदवार की जमानत 30 हजार रुपये, नगर परिषद अध्यक्ष के लिए 20 हजार रुपये और नगर पालिका चेयरमैन के लिए 10 हजार रुपये थी। महिला तथा SC/ST/OBC उम्मीदवारों के लिए इसकी राशि आधी निर्धारित की गई थी।
यानी पार्षद का चुनाव जीतना निकाय प्रमुख का उम्मीदवार बनने की अनिवार्य शर्त नहीं है, लेकिन अंतिम फैसला निर्वाचित पार्षदों के वोट से ही होता है।
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