सवाई माधोपुर: Sawai Madhopur जिला मुख्यालय स्थित जिला न्यायालय (Sawai Madhopur District Court) के मुख्य द्वार के सामने शनिवार को एक बार फिर पेड़ों (Tree) पर कुल्हाड़ियां और कटर मशीनें चलने से विवाद की स्थिति बन गई। पेड़ों की कटाई (Felling of Trees) एवं छंटाई की सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता (Advocates) मौके पर पहुंचे और कार्य का विरोध करते हुए पेड़ों को नुकसान पहुंचाने पर कड़ा एतराज जताया।

अधिवक्ताओं ने बताया कि जिन पेड़ों की मोटी-मोटी शाखाएं काटी जा रही हैं, वे सड़क सीमा से पर्याप्त दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में उनकी कटाई या अत्यधिक छंटाई की आवश्यकता नहीं है। मौके पर मौजूद पेड़ कटाई से जुड़े व्यक्तियों द्वारा पहले ड्रेनेज एवं फुटपाथ निर्माण तथा बाद में बिजली लाइन कार्य का कारण बताया गया। अधिवक्ताओं ने कहा कि बिजली लाइन कोटेड होने के कारण केवल आवश्यक टहनियों की सीमित छंटाई कर भी कार्य किया जा सकता है। वहीं ड्रेनेज और फुटपाथ निर्माण के लिए भी एलाइनमेंट में आवश्यक परिवर्तन कर पेड़ों को बचाया जा सकता है।
अधिवक्ताओं द्वारा अनुमति पत्र मांगे जाने पर मोबाइल में दिखाई गई अनुमति केवल छंटाई (प्रूनिंग) की बताई गई, जबकि मौके पर पेड़ों की बड़ी-बड़ी शाखाएं काटी जा चुकी थीं। पेड़ कटाई का विरोध किए जाने के बाद सार्वजनिक निर्माण वि भाग (विद्युत शाखा) के कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) हेमंत कुमार भी मौके पर पहुंचे। अधिवक्ताओं द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि विभाग के पास बिजली संबंधी कार्यों के लिए पेड़ों को काटने की कोई अनुमति नहीं है तथा विभाग केवल आवश्यक छंटाई (प्रूनिंग) का कार्य कर रहा है। अधिवक्ताओं के अनुसार जेईएन हेमंत कुमार ने यह भी कहा कि जिस प्रकार पेड़ों की कटाई की जा रही है, वह उचित नहीं है।
इस अवसर पर एडवोकेट मुकेश भूप्रेमी, एडवोकेट प्रीतम चौधरी, एडवोकेट सतीश गुर्जर, एडवोकेट प्रशांत शर्मा, एडवोकेट सुनील मीणा, एडवोकेट प्रेमराज मीणा, एडवोकेट दिनेश मीणा, एडवोकेट जसवंत मीणा, एडवोकेट दौलत सिंह, एडवोकेट अवधेश शर्मा, एडवोकेट गोविंद प्रसाद शर्मा सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पेड़ कटाई का विरोध किया। अधिवक्ताओं ने कहा कि पेड़ प्रत्येक जीव के जीवन के लिए आवश्यक हैं।
राजस्थान (Rajasthan) जैसे राज्य में पहले से ही हरित आवरण की कमी है, ऐसे में विकास कार्यों के नाम पर लगातार पेड़ों को नुकसान पहुंचाना चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से तहसीलदार (Tahsildar) की अनुमति का हवाला देकर शहर में लगातार पेड़ों की कटाई की जा रही है। बजरिया रोड, आलमपुर रोड सहित विभिन्न क्षेत्रों में सैकड़ों पेड़ काटे जा चुके हैं और अब सिंगल जटवाड़ा रोड तथा अन्य स्थानों पर बचे हुए पेड़ भी निशाने पर हैं।
अधिवक्ताओं ने कहा कि पेड़ कटाई का मामला पर्यावरण प्रेमियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा न्यायालय में उठाया जा चुका है और प्रकरण वर्तमान में विचाराधीन है। इसके बावजूद लगातार पेड़ों की कटाई और अत्यधिक छंटाई किए जाने से नागरिकों में रोष व्याप्त है। अधिवक्ताओं ने प्रशासन से मांग की कि पेड़ों की कटाई एवं छंटाई से संबंधित सभी अनुमतियों की जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए तथा विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। मौके पर विरोध के बाद कुछ समय के लिए पेड़ कटाई का कार्य रुकवा दिया गया।
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