Friday , 2 October 2026
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मदरसा बोर्ड खत्म, नई शिक्षा व्यवस्था शुरू! जानिए क्या-क्या बदला

उत्तराखंड: उत्तराखंड में आज से यानि 1 जुलाई से मदरसा शिक्षा (Madrasa Education) व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। राज्य सरकार (Goverment of Uttarakhand) ने मदरसा बोर्ड को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है। अब प्रदेश के सभी मदरसों का संचालन, मान्यता और शैक्षणिक व्यवस्था उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (Minority Education Authority) के माध्यम से होगी तथा उन्हें उत्तराखंड राज्य शिक्षा बोर्ड (Uttarakhand State Education Board) से जोड़ा जाएगा।

 

madrasa board scrapped in uttarakhand Vikalp Times CM Pushkar Singh Dhami

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami) ने इसी वर्ष फरवरी में मदरसा (Madrasa) बोर्ड को समाप्त करने की घोषणा की थी। इसके बाद सरकार ने जुलाई से सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को नई व्यवस्था के तहत लाने और राज्य शिक्षा बोर्ड से मान्यता दिलाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे, जिन्हें अब लागू कर दिया गया है।

दरअसल, वर्ष 2011 में गठित उत्तराखंड मदरसा बोर्ड (Uttarakhand Madrasa Board) को करीब 15 वर्षों में भी राज्य शिक्षा बोर्ड के समकक्ष मान्यता नहीं मिल सकी थी। इसके चलते मदरसों से जारी तहतानिया, फौकानिया, मुंशी, मौलवी और आलिम जैसे प्रमाणपत्रों को सरकारी नौकरियों और कई शैक्षणिक संस्थानों में मान्यता नहीं मिलती थी, जिससे छात्रों के लिए रोजगार और उच्च शिक्षा के अवसर सीमित हो जाते थे।

मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद छात्रों के प्रमाणपत्रों का महत्व बढ़ेगा। इससे उन्हें सरकारी नौकरियों (Government job) और उच्च शिक्षा (Higher Education) में बेहतर अवसर मिलेंगे। साथ ही, भविष्य में मदरसों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने की भी उम्मीद जताई जा रही है।

पिछले कुछ वर्षों में मदरसों में नामांकन लगातार घटा है। वर्ष 2023-24 की तुलना में 2024-25 में मुंशी, मौलवी और आलिम जैसे पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या में कमी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि मान्यता की कमी और सीमित करियर विकल्प इसके प्रमुख कारण रहे हैं।

हालांकि, इस बदलाव के साथ मदरसा बोर्ड में कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। बोर्ड में कार्यरत कई कर्मचारी सरकार से अपनी सेवा शर्तों और पुनर्वास को लेकर स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं।

राज्य सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और व्यावहारिक बनाना है। राज्य शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू होने से मदरसों के छात्रों को आधुनिक शिक्षा, उच्च शिक्षा और रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।

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