
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत, रिफाइनिंग लागत, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकारों के वैट के बाद पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत तय होती है। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों और शहरों में ईंधन के दाम अलग-अलग होते हैं।
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