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गर्भाशय निकालकर गन्ना काटने गईं 843 महिलाएं, 477 सिर्फ 30-35 साल की!

महाराष्ट्र के बीड में गन्ना मजदूर महिलाओं की दर्दनाक मजबूरी: 843 ने 2024 में ही गर्भाशय निकलवाया, समस्या 2026 में भी जारी

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र (Maharashtra) के बीड (Beed) जिले से गन्ना (Sugarcane) कटाई करने वाली महिला मजदूरों के गर्भाशय (Hysterectomy) निकलवाने का मामला फिर से सुर्खियों में है। राज्य स्वास्थ्य विभाग की 2025 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, 2024 की गन्ना कटाई सीजन से पहले 843 महिला मजदूरों ने अपना गर्भाशय (हिस्टेरेक्टॉमी) निकलवा लिया था। इनमें से 477 महिलाएं सिर्फ 30-35 साल की उम्र की थीं।

 

uterus removed 843 women sugarcane harvesting 477 aged 30 35 Beed Maharashtra News

 

 

ये महिलाएं हर साल बीड से महाराष्ट्र, कर्नाटक और अन्य राज्यों के गन्ने के खेतों में माइग्रेंट मजदूरी करने जाती हैं। काम की कठिन परिस्थितियां, 12-16 घंटे की लगातार मेहनत, कोई छुट्टी नहीं, और पीरियड्स या प्रेग्नेंसी के दौरान मजदूरी गंवाने का डर, उन्हें इस कदम पर मजबूर करती है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 3,415 महिलाएं एनीमिया से पीड़ित थीं और 1,523 महिलाएं गर्भवती हालत में भी खेतों में काम करती रहीं।

 

 

 

पुरानी समस्या, नई चिंता:

2019 की जांच में बीड जिले में 13,000 से ज्यादा महिलाओं ने पहले ही ऐसा कर लिया था। 2022 से मार्च 2025 तक आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 211 सर्जरी दर्ज हुईं, लेकिन स्वास्थ्य सर्वे में 843 का आंकड़ा उन महिलाओं का है जिन्होंने 2024 से पहले सर्जरी कराई।

 

 

2025 में जिले में कुल 1,310 हिस्टेरेक्टॉमी हुईं, जिनमें 113 गन्ना मजदूर महिलाएं शामिल थीं। महाराष्ट्र सरकार ने अब मॉनिटरिंग कमेटी को मजबूत करने और हर तीन महीने में रिव्यू करने का फैसला लिया है।

 

क्यों हो रही है यह मजबूरी?

– पीस-रेट मजदूरी प्रणाली में एक दिन का ब्रेक भी सैकड़ों रुपये का नुकसान।
– ठेकेदारों द्वारा लोन देकर सर्जरी कराने के आरोप।
– प्राइवेट क्लिनिक्स में अनावश्यक सर्जरी।
– जागरूकता और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी।

 

 

डॉक्टर्स चेतावते कहते हैं कि कम उम्र में गर्भाशय निकलवाने से महिलाओं को अर्ली मेनोपॉज, ऑस्टियोपोरोसिस और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि गन्ना उद्योग में महिलाओं के लिए मासिक धर्म लीव, बेहतर स्वास्थ्य जांच और उचित मजदूरी सुनिश्चित की जाए।

यह मामला गरीबी, सूखा, श्रम शोषण और स्वास्थ्य जागरूकता की कमी का दर्दनाक उदाहरण है। सरकार की निगरानी बढ़ रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव अभी भी बहुत धीमा है।

स्रोत: महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग रिपोर्ट (2025), News18 (जून 2025), Hindustan Times (जनवरी 2026), The Guardian और अन्य रिपोर्ट्स।

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