नई दिल्ली: नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पिछली घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया, जबकि पहले भी परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक को लेकर निर्देश दिए जा चुके हैं।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए इस बात पर चिंता जताई कि पेपर लीक के कारण नीट परीक्षा (NEET Exam 2026) को रद्द करना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है। डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की ओर से दायर याचिकाओं में NTA को हटाकर नई स्वतंत्र परीक्षा एजेंसी बनाने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने NTA को निर्देश दिया कि वह 14 नवंबर 2024 को गठित मॉनिटरिंग कमेटी की स्थिति और उसकी सिफारिशों पर उठाए गए कदमों की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे।
कोर्ट ने पूर्व इसरो चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन को भी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।दरअसल, 2024 के नीट यूजी (NEET) पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता डॉ. के. राधाकृष्णन ने की थी। इस कमेटी को परीक्षा प्रणाली को मजबूत और पारदर्शी बनाने के सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। गौरतलब है कि इस बार भी पेपर लीक के आरोपों के बाद केंद्र सरकार और NTA ने 3 मई को आयोजित नीट परीक्षा (NEET UG) को रद्द कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले में परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही तय करने पर जोर दे रहा है।
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